1924-25 के पुराने नक्शे से पीवी सत्यापन पर सवाल, पटवारी संघ ने खोला मोर्चा

पीवी ऐप की तकनीकी और मैदानी समस्याओं से नाराज पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर; वेतन विसंगति, पदोन्नति और कार्रवाई वापस लेने की मांग

नायब तहसीलदार अंजलि नागेश को सौंपा ज्ञापन, पटवारियों ने कहा—पुराने नक्शे के आधार पर फसल सत्यापन में आ रहीं गंभीर व्यवहारिक कठिनाइयां

गम्हरी। पीवी ऐप के माध्यम से फसलों के भौतिक सत्यापन में आ रही तकनीकी एवं व्यवहारिक समस्याओं और पटवारियों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को लेकर राजस्व पटवारी संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अपनी लंबित मांगों के निराकरण को लेकर संघ ने 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पटवारी संघ ने नायब तहसीलदार अंजलि नागेश को ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं।

संघ की प्रमुख आपत्तियों में कोंडागांव जिले में वर्ष 1924-25 के पुराने नक्शे के आधार पर पीवी ऐप में फसल सत्यापन कराने का मुद्दा भी शामिल है। पटवारियों का कहना है कि जिले में अब तक बंदोबस्त नहीं होने के कारण पुराने नक्शे के आधार पर वर्तमान खेतों की सही पहचान और फसल का सत्यापन करना व्यवहारिक रूप से बेहद कठिन है। संघ ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैदानी परिस्थितियों और अभिलेखों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखे बिना काम का दबाव बनाया जाना उचित नहीं है।

1924-25 के नक्शे से कैसे होगा सही सत्यापन?

राजस्व पटवारी संघ के अनुसार, कोंडागांव जिला पूर्व में बस्तर जिले के अंतर्गत तहसील के रूप में था। संघ का दावा है कि वर्तमान में पीवी ऐप के माध्यम से फसल सत्यापन के लिए वर्ष 1924-25 के नक्शे का उपयोग करने में गंभीर व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं। पटवारियों का कहना है कि पुराने नक्शे और वर्तमान खेतों की वास्तविक स्थिति में अंतर होने पर सही रकबे एवं फसल की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

संघ ने इस व्यवस्था का व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग करते हुए कहा कि जब तक अभिलेखों, नक्शों और मैदानी स्थिति का उचित मिलान नहीं हो जाता, तब तक पटवारियों पर त्रुटिरहित सत्यापन का दबाव बनाना उचित नहीं है। इस संबंध में संबंधित विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश और तकनीकी समाधान की अपेक्षा जताई गई है।

10 डिसमिल की जगह 10 एकड़ दर्ज होने की आशंका, विवाद की जताई चिंता

पटवारी संघ ने पीवी सत्यापन के लिए सर्वेयर की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। संघ के अनुसार, सर्वेयर की नियुक्ति के लिए पंचायतों पर दबाव बनाए जाने और उनके भुगतान की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पटवारियों ने आशंका जताई कि यदि पुराने नक्शे अथवा रकबे की गलत पहचान के कारण फसल का विवरण गलत दर्ज हो गया, तो भविष्य में किसान और पटवारी के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।

संघ ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वास्तविक रकबा 10 डिसमिल हो और सत्यापन में गलती से 10 एकड़ दर्ज हो जाए, तो इसका गंभीर परिणाम सामने आ सकता है। ऐसी संभावित त्रुटियों से बचने के लिए सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता, सही अभिलेखों और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

कई शासकीय जिम्मेदारियों के बीच अतिरिक्त कार्य का दबाव

ज्ञापन में पटवारी संघ ने बताया कि पटवारी पहले से ही अनेक शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इनमें डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, सिंचाई संबंधी कार्य, जनगणना के प्रथम चरण की तैयारी, विभिन्न सर्वेक्षण, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्र, स्वामित्व योजना, सेवा संकल्प शिविर और प्रोटोकॉल संबंधी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

संघ का कहना है कि इतने कार्यों के बीच पीवी ऐप की समस्याओं का समाधान किए बिना अतिरिक्त दबाव बनाया जाना कर्मचारियों के लिए कठिनाई बढ़ा रहा है। संघ ने मांग की है कि शासन मैदानी कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए कार्यों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।


स्थानांतरण और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने की मांग

राजस्व पटवारी संघ ने बलौदाबाजार जिले में पटवारी पदाधिकारियों एवं अन्य पटवारियों के स्थानांतरण और कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने तथा महासमुंद जिले में निलंबन की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संघ ने संबंधित कार्रवाइयों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद और सकारात्मक पहल के माध्यम से किया जाना चाहिए।

वेतन विसंगति और पदोन्नति के लंबित मामले भी बने मुद्दा

पटवारी संघ ने लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति और पदोन्नति संबंधी मामलों के शीघ्र निराकरण की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर निर्णय नहीं होने से असंतोष बढ़ रहा है। इन मामलों का नियमानुसार निराकरण कर कर्मचारियों को राहत देने की मांग की गई है।

13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल, समाधान पर टिकी निगाहें

पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि पीवी ऐप की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान, पटवारियों के विरुद्ध की गई संबंधित कार्रवाई वापस लेने तथा वेतन विसंगति एवं पदोन्नति के मामलों का निराकरण उसकी प्रमुख मांगें हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

अब देखना होगा कि प्रस्तावित हड़ताल के बीच शासन-प्रशासन पटवारी संघ की मांगों पर क्या कदम उठाता है। पीवी सत्यापन की प्रक्रिया में तकनीकी एवं मैदानी समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है, इस पर पटवारियों के साथ-साथ किसानों की भी नजरें टिकी रहेंगी।

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