108 माओवादी कैडरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, 3.29 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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लक्ष्मीनाथ नाग

बस्तर में शांति की बड़ी पहल — ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान को मिली ऐतिहासिक सफलता

जगदलपुर। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्य भवन (पुलिस कोआर्डिनेशन सेंटर) लालबाग में बुधवार को नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े कुल 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
इन आत्मसमर्पित कैडरों में 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर लगभग 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और नक्सल विरोधी अभियानों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

आत्मसमर्पण से सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से प्राप्त सूचनाओं और खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए AK-47, INSAS, LMG और BGL सहित कुल 101 घातक हथियार बरामद किए हैं।

बरामद हथियारों में प्रमुख रूप से शामिल हैं—

07 AK-47 राइफल

10 INSAS राइफल

05 SLR राइफल

04 LMG

20 .303 राइफल

25 बारह बोर राइफल

11 BGL लांचर

51 मिमी मोर्टार सहित अन्य हथियार
जिला-वार कार्रवाई में नारायणपुर से 49, बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से 9, दंतेवाड़ा से 5 तथा कांकेर से 2 हथियार बरामद किए गए।
डंप से 3.61 करोड़ नकदी और सोना भी बरामद

सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादियों के डंप से 3.61 करोड़ रुपये नकद तथा 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का लगभग 1 किलोग्राम सोना भी बरामद किया गया है।
नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक ही स्थान से इतनी बड़ी नकदी बरामद होना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

माओवादी संगठन के बड़े पदाधिकारी भी हुए शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के कई बड़े पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें—

पश्चिम बस्तर डिवीजन के DVCM राहुल तेलाम, पंडरु कोवासी और झितरु ओयाम

पूर्व बस्तर डिवीजन के रामधर उर्फ बीरु

उत्तर बस्तर डिवीजन के मल्लेश

PLGA बटालियन के CYPC कमांडर मुचाकी

AOB क्षेत्र के कोसा मंडावी

जैसे प्रमुख नक्सली नेता शामिल हैं।

26 महीनों में 2714 माओवादी लौटे मुख्यधारा में

‘‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’’ अभियान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में पिछले 26 महीनों में कुल 2714 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है।
वहीं 1 जनवरी 2024 से 9 मार्च 2026 तक बस्तर संभाग में 2625 नक्सलियों ने मुख्यधारा में वापसी की है।

आत्मसमर्पण करने वालों को मिलेगा पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन

राज्य शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को—

आर्थिक सहायता

कौशल विकास प्रशिक्षण

आवास

शिक्षा

रोजगार के अवसर

प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

नक्सलियों को पुलिस की अपील

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने शेष माओवादी कैडरों से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण करें। शासन उनके सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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