कोंडागांव जिले के ग्राम गोलावंड में डायरिया रोकथाम अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा की गई सक्रिय पहल से हालात नियंत्रण में हैं। पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी गोलावंड को डायरिया संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला स्वास्थ समिति कोण्डागांव के शासकीय पोर्टल के अनुसार 113 डायरिया के मामले पिछले 5 वर्षों में सामने आए थे, जिसके मद्देनज़र संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष रोकथाम अभियान प्रारंभ किया गया। जनवरी 2025 से अब तक डायरिया के मामले नहीं पाए गए है। राहत की बात यह है कि डायरिया से मृत्यु के कोई भी मामले नहीं पाए गए है।
विभाग द्वारा समय पर की गई निगरानी, उपचार और जन-जागरूकता की गतिविधियों के कारण स्थिति नियंत्रित बनी हुई है। इस दौरान डॉ. आर के चतुर्वेदी, पीएचईडी कोंडागांव की टीम जिसमें परियोजना समन्वयक मितलेश साहू, अमन श्रीवास्तव और सुहानी बक्शी शामिल थे, जिन्होंने ग्रामवासियों और विद्यालय के बच्चों के बीच जागरूकता सभा के माध्यम से डायरिया और उसके रोकथाम के उपाय के बारे में बताएं ।
इन सभाओं में बच्चों को हाथ धोने की सही विधि, स्वच्छ जल पीने की आदत, भोजन से पूर्व और शौच के बाद हाथ धोने का महत्व तथा खुले में शौच से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जानकारी दी गई। साफ-सफाई बनाए रखने और टॉयलेट उपयोग को लेकर भी जागरूक किया गया।
अभियान के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि लोग सतर्कता बरतें और स्वच्छ आदतों को अपनाएं। नियमित रूप से जल स्रोतों की सफाई, ढंके बर्तनों में पानी संग्रह करना, गंदे हाथों से भोजन न करना जैसे सामान्य उपायों को प्रभावी ढंग से अपनाने पर बल दिया गया।
ग्राम में लिए गए जल के नमूनों की जांच की गई, जिसमें अब तक किसी भी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण के संकेत नहीं पाए गए हैं। पीएचईडी टीम ने सरल भाषा और रोचक उदाहरणों के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझाया कि डायरिया से बचाव केवल औषधियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्वच्छ जीवनशैली के पालन से भी संभव है।
ग्रामवासियों ने इस प्रयास को सकारात्मक रूप से अपनाया और सामूहिक रूप से स्वच्छ जल के उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता और सामुदायिक सहयोग का संकल्प लिया। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि जागरूक, स्वस्थ और सुरक्षित ग्राम निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।










