माकड़ी मेला बना आस्था का महासंगम: चौंसठ परगना के देवी-देवताओं की भव्य शिरकत, मीना बाजार रहा आकर्षण का केंद्र

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देवेन्द्र कुमार नाग कि रिपोर्ट -माकड़ी से
माकड़ी का प्रसिद्ध देव मेला इस वर्ष भी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ भव्य रूप में सम्पन्न हुआ। मेले में आस-पास के चौंसठ परगना से आए देवी-देवताओं की पावन उपस्थिति ने पूरे आयोजन को दिव्यता और श्रद्धा से सराबोर कर दिया। दूर-दराज़ के गांवों से हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला।

मेले की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई, जहां ग्रामवासियों एवं श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं का विधिवत स्वागत पुष्पवर्षा और वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ किया। जैसे ही देवताओं की शोभायात्रा मेला स्थल पर पहुंची, पूरा वातावरण जयकारों और ढोल-नगाड़ों की ध्वनि से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट करते हुए पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

इस दौरान मेले में मीना बाजार लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना रहा। बाजार में घरेलू उपयोग की वस्तुओं, खिलौनों, कपड़ों, श्रृंगार सामग्री और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। खासकर महिलाओं और बच्चों में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

इसके अलावा मेले में लगे झूले, मनोरंजन के साधन और पारंपरिक खान-पान के स्टॉल ने भी लोगों का मन मोह लिया। बच्चों और युवाओं ने झूलों का भरपूर आनंद लिया, वहीं स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाते हुए लोगों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, माकड़ी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जहां लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, खुशियां बांटते हैं और अपनी परंपराओं को जीवंत रखते हैं।
माकड़ी का यह भव्य मेला एक बार फिर आस्था, उत्साह और परंपरा का अनूठा संगम साबित हुआ, जिसने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया।

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