चलित थाना के माध्यम से विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

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गौतम कश्यप

विश्रामपुरी उच्च माध्यमिक विद्यालय एटेकोनाडी में तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण केशकाल एवं थाना केशकाल कि संयुक्त टीम कि ओर चलित थाना के माध्यम से विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव अध्यक्ष/ न्यायाधीश श्रीमान उत्तरा कुमार कश्यप के आदेशानुसार एवं तालुक विधिक सेवा प्राधिकरण केशकाल अध्यक्ष/ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमति अंजली सिह के मार्गदर्शन एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव सुश्री गायत्री साय के निर्देश में शिविर आयोजित किया गया । जिसमें रिटेनर अधिवक्ता श्रीमति मनीषा तिवारी व्यवहार न्यायालय केशकाल के द्वारा बच्चों को गुड टच बैड टच के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि
अगर कोई आपको टच करता है और आपको अच्छा लगता है या स्नेह की अनुभूति होती है तो यह गुड टच कहलाता है। आप अपनी मां, पिता, बड़ी बहन, दादी के टच से फील कर सकते हैं।
बैड टच क्या होता है ? जब कोई व्यक्ति आपको इस तरह से छूता है कि आप इससे असहज महसूस करते हैं या फिर उस व्यक्ति का छूना आपको बुरा लगता है वह बैड टच है। अगर आपको किसी का छुना अच्छा नहीं लगा रहा है तो आप इसके संबंध में अपने माता-पिता एवं शिक्षक को अवश्य बताएं और पाक्सो एक्ट के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों (बालक/बालिकाओं) के साथ यौन अपराध करना बहुत गंभीर अपराध कि श्रेणी में आता है और इसके लिए कठोर दण्ड कि प्रवधान है। और इसमें सहमति का प्रवधान है।
अभिव्यक्ति एप्लिकेशन से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई इसमें महिलाओं कि तत्काल सुरक्षा एवं सहायता हेतु उपयोगिता के संबंध में बताया गया।
चलित थाना केशकाल, श्रीमति जयो चन्द्रवंशी महिला प्रधान आरक्षक केशकाल के द्वारा साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी अनजान नंबर द्वारा फोन आने पर अचानक से नहीं उठाना चाहिए और आपको मोबाइल के द्वारा किसी भी प्रकार का दस्तावेज मांगने पर अनजान व्यक्ति को जानकारी नहीं देना है। और यातायात से संबंधित भी जानकारी दी गई और
पी एल वी अनिल कुमार मंडावी के द्वारा शिविर में बाल तस्करी से संबंधित जानकारी देते हुए बताया कि बाल तस्करी को शोषण के उद्देश्य से किसी बच्चे की “भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, आश्रय या प्राप्ति” के रूप में परिभाषित किया गया है। यह परिभाषा संयुक्त राष्ट्र पलेर्मो प्रोटोकॉल से ली गई है। पलेर्मो प्रोटोकॉल और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। बच्चों पर शिक्षा अधिकार ,एवं बाल श्रम जिसे अपराध माना गया है।

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